अनंत तस्‍वीरें दृश्‍यावलियां ख़बर ब्‍लॉग्‍स

बेटियों की ललाई

बेटियों कि आस्था,

बेटियों पर विश्वास

बनता है एक सहज पुल

अचानक जब बेटी अपनी दहलीज लाँघ पार कर अति है सात दरियाओं का अनंत उद्गार।

बेटियाँ जब होती हैं, मन मलिन कर लेते हैं

पर भर आती हैं आँखे,

जब पार कर लेती हैं वे सूरज की ऊम्चाइयां

बेटी को अब मन नही करता

बोलूँ उसे दुर्गा, सीता, सरस्वती

छोर चुकी है वह अब इन प्रतिमानों को बहुत पीछे

अपने यहाँ एक खली ग्लास है

जिसमे से छलकती है उसकी सूरत

कुछ पहचानी सी

कुछ कुछ अनजानी सी

मन कबतक धरे धीर

बेटियों का आगमन होता रहे जलस्दी ज़ल्दी

भरे वह अपनी हँसी से मान का अंचल,

पिटा का दामन

बहन की मुस्कान

भाई की बने जान

बेतिया अब सगार पुत्र भी नही

वे हैं अनंत आकाश

हर सीमा के आर-पार।

तेरी मम्मी चुडैल जैसी

विमल भाई ने पंचमी कि बात की तो एकदम से उसकी याद ताज़ा हो आई। टैब हम सब एक ही बिल्डिंग मी रहते थे। पंचमी बहुत ही छूती थी। वाट कोशी के साथ खेलती। उन दिनों शहर मी विशाल भारद्वाज कि फ़िल्म 'मकडी' लगी थी। उसमे शबाना आज़मी ने चुडैल की भुमिका निभाई है। हमने भी वह फ़िल्म देखी। पंचमी ने भी देख रखी थी। सो दूसरे दिन जैसे ही कोशी नीचे पहुँची, उसने कहा, 'अए कोश्य्य, तेरी मामी ना, मकडी की चुडैल जैसी लगती है।' पता नहीं, क्या संयोग रहा है कि लोग अक्सर मेरी शक्ल की तुलना शबाना से कर देते हैं। कोशी को यह मालूम है, इसलिए उसने हम सबको आ कर बताया। हम सब खूब हँसे। एकाध दिन बाद विमल भाई, तनुजा, पंचमी हमारे यहाँ आए, कोशी ने यह ज़िक्र cheedaa। पति-पत्नी तो एकदम से सकपका गए। आख़िर कोई किसी के सामने ही उसे चुडैल कहे तो... तनुजा तो लगी पंचमी को डांटने। मैंने कहा कि अरे, यह तो उसने सही कहा है, मई लगती ही हूँ, उस चुडैल जैसी। और आप यह तो देखिये कि इस बच्ची ने कितने शार्प तरीके से इसे पकडा है।' विमल भाई, झेन्पिये मत, बेटी की बात का मज़ा लीजिये। आज उसे देख कर, उसके बारे मी पढ़ कर एकदम से उसकी याद ताज़ा हो गई। यह प्रसंग भी याद आ गया। उसे हमारा ढेरों प्यार.