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और यह कोशी का ब्लॉग

बहुत इसरार करने पर आखिर कोशी ने अपना ब्लॉग बना ही लिया. वह नई नई बातें सोचने में जितनी तेज़ है, उसे कार्यांवित करने में उतनी ही आलसी. यह ब्लॉग भी लगातार कोंचते रहने का नतीज़ा है. हालांकि कम्प्यूटर पर सारे कामों में वह मेरी मदद करती है, मुझे सिखाती है, मगर अपनी ही बातों के प्रति उदासीन है. हो सकता है, यह किशोर उम्र का तकाज़ा हो. आखिर हम जब इस उम्र में थे तो क्या कर लेते थे? कुछ भी नहीं. उस लिहाज़ से आज के बच्चे बडे तेज़, समय के साथ बल्कि समय से तनिक आगे ही हैं.
कोशी ने दो साल पहले, जब वह दसवीं में थी, तब अपनी क्लास की कुछ दोस्तों के साथ मिलकर एक ब्लॉग बनाया था, उसका नाम था-http://paripoems.blogspot.com/ इसमें वह और उसकी दोस्त अपनी लिखी कविताएं पोस्ट करती रहीं. फिर जैसा कि होता है, इस ब्लॉग से उसका मन उचट गया. दोस्तों ने भी लिखना बन्द कर दिया, कोशी ने भी. बाद में इस ब्लॉग से कुछ कविताएं ले कर मैने अपने ब्लॉग http://chhutpankikavitayen.blogspot.com/ पर डालीं.
इसके बाद कोशी ने फिर एक ब्लॉग बनाया. मगर क्या बनाया, किस नाम से, क्या लिखा, कुछ याद नहीं. इस पर एक गीत लिखा जा सकता है.
कोशी के अबतक के जीवन में कई विचार आए -अपने कैरियर को ले कर. वह अपनी दीदी तोषी की तरह शुरु से मुतमईन नहीं थी कि उसे आर्टिस्ट ही बनना है. उसके कैरियर-विचार की यात्रा शुरु होती है 1994 से, जब सुष्मिता सेन मिस यूनिवर्स और ऐश्वर्या राय मिस वर्ल्ड बनी थी. तब वह दो साल की थी, मगर किसी के पूछने पर कि वह क्या बनेगी, बडे स्टाइल में गर्दन टेढी करके बोलती थी- "मिस वर्ल्ड". फिर सुन्दरता के इस संसार से उसका मोह भंग हुआ, जब वह स्कूल पहुंची. तब वह अपने टीचर्स के सम्पर्क में आई और हर बच्चे की तरह राग अलापने लगी कि वह बडी हो कर टीचर बनेगी. इसके बाद उसकी सोच में तनिक ठहराव आया और फोटोग्राफी करने लगी. तब फिर वह कहने लगी कि वह इस फील्ड में भी अपना कैरियर बनाने की सोच सकती है.
इसके साथ ही वह सोचने लगी अपने कैरियर के बारे में और कहने लगी कि वह अब फैशन डिजाइनर बनेगी. अबतक अपने कैरियर-विचार के इस जंगे मैदान में डटी हुई है. उसके प्रति तनिक गम्भीर भी है. अपने रोजाना के पहरावे में भी उसकी अलग रुचि है और पहनने के तौर तरीके एकदम अलग. इससे लगता है कि वह इस लाइन में चली जाएगी.
कोशी के इस ब्लॉग में आज के फैशन, उस पर उसके विचार, अपने पहनावे और रहन सहन पर उसकी टिप्पणियां, उसकी तस्वीरें, उसके साथ रोजाना होनेवाली बातें, उसके दोस्त, उनकी बातें सब आएंगी, मगर ज़रा धीरे धीरे. अभी वह अपने को सहेजने में लगी है और अपने रोजाना के घटनाक्रम से अपनी यात्रा की शुरुआत की है. लिखना शुरु किया है, आप सबके मार्गदर्शन, सुझाव, स्नेह से उसे अपने ब्लॉग को संवारने में मदद मिलेगी और खुद को भी. और हां, उसके ब्लॉग का नाम है- http://koshysblog.blogspot.com/

"एक्सप्लोसिव्स" में तोषी ने उकेरा ड्राइंग का एक नया पन्ना


आज जब हिन्दुस्तान और पाकिस्तान दोनों ही देश एक दूसरे के खिलाफ आग उगल रहे हैं, वैसे में तोषी यानी विधा सौम्या अपनी कला के माध्यम से दोनों देशों के बीच एक नया पुल रचने की प्रक्रिया में है. ज़ाहिर है कि पुल निर्माण की इस प्रक्रिया में वह अकेली नहीं है. उसके पाकिस्तान के दोस्त और शुभचिंतक भी हैं, जिनके लिए कला और अभिव्यक्ति एक दूसरे को समझने के बेहतरीन माध्यमों में से एक है.
आज तोषी के आर्ट एक्जीबिशन की ओपनिंग है- लाहौर के "ग्रेनॉयज" आर्ट गैलरी में. अपने लाहौर प्रवास में उसके चित्रों की कई एकल व ग्रुप प्रदर्शनियां हो चुकी थी. हिन्दुस्तान आने के बाद लाहौर के लिए यह उसकी पहली प्रदर्शनी है. मुंबई में उसका एक ग्रुप शो हो चुका है.
"एक्सप्लोसिव्स" नाम से 15 ड्राइंग के सेट की एक पूरी की पूरी किताब इस प्रदर्शनी में है. इस ड्राइंग के सेट में आज शहर में एक शहरी तरीके से जी रहे जीवन के अन्दाज़ को अपनाए हुए उन लोगों के बारे में कहा गया है जो शहर में रहते हुए और शहर की नज़ाकत के साथ पलते हुए मीडिया और पत्र-पत्रिकाओं के माध्यम से सेक्स और सेक्स की दुनिया को समझने की कोशिश करते हैं और तदनुसार उसे अपने जीवन में ढालने का प्रयास करते हैं. और इस तरह से सेक्स उनके जीवन में एक योजनाबद्ध रूप में प्रस्तुत होता है.
इस ड्राइंग के सेट में साहित्य में व्यंग्य की तरह इन रेखा चित्रों में व्यंग्य कुछ कुछ कार्टून की शक्ल में आते हैं, जो लोगों को तनिक हंसाते, तनिक गुदगुदाते हैं. किंतु, व्यंग्य रचना की तरह ही यह जीवन के उन गहरे पन्नों को भी खंगालने की कोशिश करते है.
प्रदर्शनी में गई पुस्तक मूल पुस्तक का प्रिट फॉर्म है. यह हाथ से बनाई एक किताब के रूप में है और इसी रूप में इसे प्रदर्शनी में रखा जा रहा है. इसे डिजिटली पुन:प्रस्तुत किया गया है, मगर इतनी सफाई से कि यह मूल कार्य का सुख देता है. बन्द रूप में यह किताब 10x8.5" इंच व खुले रूप में 10x17" इंच की है. यह प्रदर्शनी 25 -30 अक्तूबर, 2009 तक चलेगी.