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कोशी का बदलता स्वभाव

कोशी अब बड़ी हो रही है। अब उसे बड़ा होते देख मन करता है की वह फायर से नन्ही बच्ची बन जाए और हम सब उसके साथ फ़िर से खेलें। लेकिन कोशी इसके लिए राजी नही है। उसका कहना है की ऐसा होने से उसे फ़िर से नर्सरी से अबतक की पढाई पढ़नी पड़ेगी। उसकी बात में दम है। अब उसके काम में वज़न है। कल जब मैं दफ्तर से घर लौट रही थी तो उसने मुझे नीचे ही रुकने को कहा। नीचे आकर बोली की उसे बड़ी तेज़ भूख लगी है। वह नूडल्स खरी कर लाने लगी। लौटते में अचानक रुक कर कहने लगी की दीदी (तोषी) को भी भूख लगी होगी। उसके लिए भी ले लेते हैं। रात में आकर कहने लगी की पैसे दो, अम्मा की दवा ख़त्म हो गई है। दवा लाकर उसने ख़ुद ही उन्हें दवा दे दी। तीन दिन पहले वह अम्मा के लिए गाउन खरीद कर लाई। एक दिन ना पहनाने पर वह तनिक नाराज़ हो गई। दूसरे दिन पहना देने पर वह खुश हो गई। अब वह अपनी अम्मा से कहती है की अब आप सादी के बदले यही पहनिए। यही अच्छा लगता है। अपनी लाई हुई चीज़ के उपयोग से वह खुश है। उसकी जिम्मेदारियों का अहसास मन को अच्छा लगता है, मगर कभी-कभी लगता है की तोशी, कोशी दोनों फ़िर से बच्चे बन जायेम तो उनके साथ खेलने में कितना मज़ा आएगा!

2 comments:

Santhosh said...

very true...took me to my childhood...keep writing...

by the way which application are you using for typing in Hindi..? when i was searching for the user friendly Hindi typing tool...found 'quillapd'..do u know abt it...?try out and tell me..

पुनीता said...

मेरी श्रुति और मीठी दोनो के उम्र मे छह साल का फासला. सुबह उठकर हम सब अब मीठी के साथ खेलते हैं. पर मुझे अब भी मन करता है कि मैं श्रुति के साथ खेलूं. हमदोनो आहिस्ते से सुबह दो चार मीठी बातें कर लेते हैं उसे मुझ से सटना बहुत पसंद है. थोडी सी भी तेज आवाज से मीठी जग जाती है. और हम सब फिर उसके साथ खेलते हैं.
जीवन के इस पल को संभाल लेना ही बहुत बड़ी बात है.
बेटीयां बहुत जल्दी बड़ी हो जाती है.