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जोश 18 पर बेटियों का ब्‍लॉग

बेटियों के इस ब्‍लॉग से लोग अपनापा महसूस कर रहे हैं, ये हम पिताओं के लिए अच्‍छी ख़बर है। बहुत सारे दोस्‍तों ने (इनमें मां भी शामिल हैं और पिता भी) इस क्‍लब में शामिल होने की हसरत ज़ाहिर की है। कुछ ने हमें अपना लिखा भेजा भी है। हम उनसे वादा करते हैं कि उन सबके अनुभव यहां साझा किये जाएंगे, बस थोड़ी सी मोहलत दे दें। इस बीच ख़बर ये है कि अपने ब्‍लॉगर दोस्‍त गिरींद्र नाथ झा, जो कि इंडो एशियन न्‍यूज़ सर्विस से जुड़े हैं, उन्‍होंने जोश 18 में इस ब्‍लॉग के बारे में लिखा है। क्‍या लिखा है, आइए पढ़ते हैं।

ब्लॉग जो सिर्फ बेटियों का है!

11 फरवरी 2008
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस
गिरीन्द्र


नई दिल्ली। इसमें कोई दो राय नहीं है कि इंटरनेट पर हिंदी की उपस्थिति इन दिनों लगातार बढ़ती जा रही है। ब्लॉग के जरिए तो इसमें और इजाफा हो रहा है। ब्लॉग जगत में इन दिनों एक नए तरह के ब्लॉग का उदय हुआ है। खास बात यह है कि इस विशेष ब्लॉग में केवल और केवल बेटियों की ही चर्चा हो रही है।

जी हां, ‘बेटियों का ब्लॉग’ एक ऐसा ही ब्लॉग है जहां ब्लॉगर माता-पिता अपनी बेटियों के बारे में बातें लिखते हैं। दरअसल, यह एक सामुदायिक ब्लॉग है जहां एक ही छत के नीचे कई ब्लॉगर माता-पिता इकट्ठा होकर अपनी बेटियों के बारे में तरह-तरह की बातें लिखते हैं।

फिलहाल इस ब्लॉग के ग्यारह सदस्य हैं। सभी लगातार ही अपनी घर के क्यारी की बिटिया के बारे में लिखते रहते हैं। इस ब्लॉग की चर्चा इन दिनों हर जगह हो रही है। काफी कम समय में यह ब्लॉग लोकप्रिय हो गया है।

इस ब्लॉग को शुरु करने वाले अविनाश ने अपने पहले पोस्ट में लिखा कि, “ये ब्लॉग बेटियों के लिए है। हम सब, जो सिर्फ बेटियों के बाप होना चाहते थे, ये ब्लॉग उनकी तरफ से बेटियों की शरारतें, बातें सांझा करने के लिए है”।

उन्होंने अपने इस पोस्ट का टाइटल रखा- ‘आइए बेटियों के बारे में बात करें’। इस ब्लॉग पर लिखने वाले सभी ब्लॉगर अपनी बेटियों के बारे सामान्य लेकिन रोचक रिपोर्ट प्रकाशित करते रहते हैं।

इसमें शामिल एक ब्लॉगर जितेन्द्र चौधरी का कहना है कि इसमें बेटियों के रोचक क्रियाकलापों को भी शामिल किया जाएगा। पत्रकार रविश कुमार अपनी पोस्ट ‘बाबा तुम बांग्ला बोलो तो’ में काफी रोचक अंदाज में बताते हैं कि चार साल की बेटी ‘तिन्नी’ उन्हें किस प्रकार बंगाली भाषा का ज्ञान दे रही हैं। बंगाली भाषा का ज्ञान बांटती अपनी बेटी के बारे में वह लिखते हैं कि वह उनसे कहती है कि, “चलो मैं सिखाती हूं। जब मैं बोलूंगी कि ‘बाड़ी ते चॉप बनानो होए छे’ तो तुम बोलेगे- ‘के बानिये छे’। फिर मैं बोलूंगी- ‘नानी बानिये छे’।

चार साल की बेटी ने एक मिनट में रैपिडेक्स की तरह बांग्ला के दो वाक्य सिखा दिए”।

एक ब्लागर पुनीता ने ‘क्या बेटियां पराई होती हैं’ के शीर्षक से अपनी बात कहने की कोशिश की है। शादी के बाद पिता के साथ एक भेंट को उन्होंने काफी अलग अंदाज में बयां किया है। इस तरह की कई रोचक पोस्ट इस ब्लॉग पर पढ़ने के लिए हाजिर हैं।

1 comment:

आशीष said...

पूरी टीम को इसके लिए बधाई हो