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कारी को चोटी लगा के उच्छूल भेजना

पिछले हफ़्ते से, जब से ठंड कम पड़ने लगी है, किलकारी ने जैकेट से तो जैसे पिंड ही छुड़ा लिया है. जब भी कभी कोशिश की जाती है उसे जैकेट पहनाने की, बोलती है, 'नहीं, कारी जैकेट नहीं पहनेगी, ठंड कम हो गयी है'. साथ में क्रेश वाले अपने मित्रों का नाम गिनाने लगती है, 'अन्नी भी नहीं पहनता जैकेट, नैना भी नहीं पहनती, क्वीन भी नहीं पहनती, दिवांछी (दिव्यांशी) भी नहीं पहनती है'. क्षण भर में कई मर्तबा वो अपनी ये दलील दुहरा देती है. मतलब ये कि अब उसने जैकेट तज दिया है. टोपी भी तज दिय है साथ में. हम उसे मंकी कैप पहनाते थे. दोनों कामकाजी होने के कारण हमारी ये कोशिश होती थी कि चाहे कपड़े का वजन उसे झेल लेना पड़े लेकिन उसकी तबीयत के कारण हम न झेलें. डांट-डपट के सहारे हमने पिछले हफ़्ते तक अपने हिसाब से उसको रखा. पर अब किलकारी ने साफ़ इंकार कर दिया हमारे धौंस को मानने से.
करीब साल भर से उसके बाल भी नहीं कटवाए गए हैं. सर्दी शुरू होने तक तो केवल कंघी कर देने से काम चल जाता था लेकिन अब जब उसने टोपी उतार दी है तो केवल कंघी से बात बनती नहीं. अब उसकी चोटी बनायी जाती है. चोटी बनाने का पुराना कोई अनुभव न होने के बावजूद ये काम लगभग मेरे जिम्मे ही आ गया है. उसने अपने लिए बालों में लगाने वाले रबड़-बैंड ख़रीदवाए हैं. अब दस मिनट तक तो उसके घुंघराले बालों को जिसे वो मैगी कहती है, कंघी से सीधा करना पड़ता है और तब जाकर कहीं उसमें रबड़ लग पाता है. पर मेरी खीझ पर उसका धैर्य अकसर भारी पड़ता है. बोलती है, 'पापा, मैं सिर नहीं हिलाउंगी तुम मेरी चोटी लगा दो'. रबड़ को वो चोटी कहती है.
और तो और रात को सोते वक़्त जब चन्द्रा उसके रबड़ निकलाने लगती है तो वो अपना दोनों हाथ चोटी पर रख लेती है और कहती है, 'कारी अपे-आप निकाल लेगी चोटी'. इस तरह रबड़ निकालती है और अपने सिराहने रख देती है और कहती है, ' कल कारी को चोटी लगा के उच्छूल (क्रेश) भेजना'.
आज बुधवार है. चोटी को लेकर उसके तरह-तरह के प्लान हैं. रबड़ और क्लिप उन प्लानों में सबसे अहम है. कल वो कह रही थी, 'मम्मी बुध बजार चलो न, कारी के लिए चोटी और क्लिप ले आएंगे'. समझाया गया कि बुधवार कल यानी आज है और तसल्ली दिलाया गया कि उसके लिए रबड़ और क्लिप आज ज़रूर ख़रीदे जाएंगे.
पिछली रातउसने स्कर्ट को लेकर भी तान छेड़ दिया. दो-चार दिनों के अंदर ही स्कर्ट को भी अलमारी के बाहर आना ही होगा.

4 comments:

आशीष said...

पढ़ना सुखद लगा। फोटो भी डाल देते और मजा आ जाता

Mired Mirage said...

कारी व उसकी चोटी बहुत पसन्द आई ।
घुघूती बासूती

चंद्रभूषण said...

इस फैशनेबुल लड़की की शक्ल तो दिखाते जरा!

mamta said...

आपके लिखे चिट्ठे से कारी की एक बड़ी प्यारी सी तस्वीर बन रही है।